रिश्तों की गहराई है, एक दूसरे की परछाई है। रिश्तों की गहराई है, एक दूसरे की परछाई है।
बचपन से लेकर बुुढापे के गलियारे तक बंंधा रहे ये बंधन आने वाले युगों-युगों तक। बचपन से लेकर बुुढापे के गलियारे तक बंंधा रहे ये बंधन आने वाले युगों-युगों तक।
साहित्य समाज का दर्पण है, इतिहास अतीत का उसमें अर्पण हैI साहित्य समाज का दर्पण है, इतिहास अतीत का उसमें अर्पण हैI
मन के दर्पण में महक उठा मेरा जीवन। मन के दर्पण में महक उठा मेरा जीवन।
कैसे मनाऊँ रुठ गया सजन जो नदिया पार। कैसे मनाऊँ रुठ गया सजन जो नदिया पार।
यही मेरी बस प्यास है ! यही मेरी बस प्यास है !